*दशानन की आफत आई*
रावण आया पृथ्वी पर,
बदला युग का रंग,
दस सिर लेकर घूमता,
छिड़ गई कैसी जंग।
कहता – "मैं तो ज्ञानी था,
ब्रह्मा से मिला वरदान,
अब तो बच्चे चिढ़ाते,
कहते 'मल्टीफेस्ड इंसान'!"
मोबाइल वाला स्टोर गया,
बोला-"लाओ फोन",
सेल्समैन ने हँस के कहा
"तुममें असली कौन है
और कौन है 'क्लोन'?"
"दस चेहरों की Face ID,
हमसे न हो पाए,
Apple बोले –
'ऐसे केस में सिस्टम ही घबराए!'
कैफे में कॉफी पीने बैठा,
हुआ बड़ा घमासान,
हर एक सिर ने माँगी चीज़ें,
उड़ा गया मग–प्लान!
एक बोला – "ब्लैक चाहिए",
दूजा बोले – "लट्टे",
तीसरा माँगे ‘शुगर फ्री’,
बाकी बोले – “कट्टे!!”
गया बैंक खाता खुलवाने,
बैंक मैनेजर घबराया,
"दस सिग्नेचर कौन करे?
पहले सिर को लाया?"
"आधार कार्ड एक है या फिर दस?"
पूछा सब हैरान,
रावण बोला –
"भइया अब तो, कटवा लूं पहचान?"
टिंडर ऐप पर आया मैसेज –
'Hi Handsome Rav !',
लड़की बोली –
"तू ही था क्या रामायण का
'बॉस फिनाले राव'?"
"दस-दस दिमाग़ों से क्या तू,
एक राय बना पाता?"
रावण बोला – "बस दिल एक है,
बाकी सब तो जाने दाता!"
पार्लर में कटवाने बाल,
पहुँचा रावण तेज चाल से,
हैयरड्रेसर बोला –
“कटिंग होगी टाइम के हिसाब से।”
“हर सिर की अलग स्टाइल हो
या सबका एक ही टोन?”
रावण बोला –
"इतना बिल मत बना देना
कि लेना पड़ जाए लोन।"
शादी करने पहुंचा तो
पंडित जी घबरा गए,
"दस बार ‘सप्तपदी’ लेंगे?
दूल्हा खुद हकला गए!"
दुल्हन बोली –
"एक पति ही है मुश्किल,
तू दस-दस में बंटा!"
रावण बोला –
"इन सिरों में बस एक समय में
एक से ही प्यार जता!"
अंत में बोला दशानन,
अपना युग अपनी लंका
ही है मित्र भली,
"इस युग ने तो बुद्धि मुझसे,
हँसते -हँसते हर ली!"
"ज्ञान रहा ना सम्मान कोई,
सब पूछें एक ही बात,
दस सिर क्यों हैं तुझ पर,
तू आदम की कौन सी जात"।
-देवेंद्र प्रताप वर्मा 'विनीत'