Tuesday, August 19, 2025

दशानन

*दशानन की आफत आई*

रावण आया पृथ्वी पर, 
बदला युग का रंग,
दस सिर लेकर घूमता, 
छिड़ गई कैसी जंग।
कहता – "मैं तो ज्ञानी था, 
ब्रह्मा से मिला वरदान,
अब तो बच्चे चिढ़ाते, 
कहते  'मल्टीफेस्ड इंसान'!" 

मोबाइल वाला स्टोर गया, 
बोला-"लाओ फोन",
सेल्समैन ने हँस के कहा 
"तुममें असली कौन है
और कौन है 'क्लोन'?"
"दस चेहरों की Face ID, 
हमसे न हो पाए,
Apple बोले – 
'ऐसे केस में सिस्टम ही घबराए!'

कैफे में कॉफी पीने बैठा, 
हुआ बड़ा घमासान,
हर एक सिर ने माँगी चीज़ें,
उड़ा गया मग–प्लान!
एक बोला – "ब्लैक चाहिए",
दूजा बोले – "लट्टे",
तीसरा माँगे ‘शुगर फ्री’, 
बाकी बोले – “कट्टे!!”

गया बैंक खाता खुलवाने, 
बैंक मैनेजर घबराया,
"दस सिग्नेचर कौन करे? 
पहले सिर को लाया?"
"आधार कार्ड एक है या फिर दस?" 
पूछा सब हैरान,
रावण बोला – 
"भइया अब तो, कटवा लूं पहचान?" 

टिंडर ऐप पर आया मैसेज – 
'Hi Handsome Rav !',
लड़की बोली – 
"तू ही था क्या रामायण का 
'बॉस फिनाले राव'?"
"दस-दस दिमाग़ों से क्या तू, 
एक राय बना पाता?"
रावण बोला – "बस दिल एक है, 
बाकी सब तो जाने दाता!" 

पार्लर में कटवाने बाल, 
पहुँचा रावण तेज चाल से,
हैयरड्रेसर बोला –
 “कटिंग होगी टाइम के हिसाब से।”
“हर सिर की अलग स्टाइल हो 
या सबका एक ही टोन?”
रावण बोला – 
"इतना बिल मत बना देना 
कि लेना पड़ जाए लोन।"

शादी करने पहुंचा तो 
पंडित जी घबरा गए,
"दस बार ‘सप्तपदी’ लेंगे? 
दूल्हा खुद हकला गए!"
दुल्हन बोली – 
"एक पति ही है मुश्किल, 
तू दस-दस में बंटा!"
रावण बोला – 
"इन सिरों में बस एक समय में
 एक से ही प्यार जता!"

अंत में बोला दशानन, 
अपना युग अपनी लंका 
ही है मित्र भली,
"इस युग ने तो बुद्धि मुझसे,
 हँसते -हँसते हर ली!"
"ज्ञान रहा ना सम्मान कोई, 
सब पूछें एक ही बात,
दस सिर क्यों हैं तुझ पर,
तू आदम की कौन सी जात"।

             -देवेंद्र प्रताप वर्मा 'विनीत'

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